माता-पिता के लिए
फ़ोन पर आया संदेश सच है या धोखा?
अब कुछ करने से पहले पूछ लीजिए।
चार बातें
चार बातें याद रखिए। और कुछ नहीं।
कोई भी बैंक OTP नहीं पूछता
कोई बैंक, कोई सरकारी दफ़्तर आपसे OTP, PIN या कार्ड नंबर कभी नहीं पूछेगा — न कॉल पर, न संदेश में। जो पूछे वह चोर है, चाहे आपका नाम जानता हो।
जो जल्दी कराए वह झूठा है
"आज ही", "एक घंटे में", "खाता बंद हो जाएगा" — यह दबाव ही धोखा है। असली बैंक हफ़्तों का समय देता है और चिट्ठी भेजता है।
पुलिस वीडियो कॉल पर गिरफ़्तार नहीं करती
पुलिस या CBI वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ़्तार नहीं करती, और केस बंद करने के लिए पैसे नहीं माँगती। स्क्रीन पर कोई कहे कि आप गिरफ़्तार हैं — फ़ोन रख दीजिए। कुछ नहीं होगा।
बच्चों को बताने से मना करे तो वही ठग है
अगर कॉल करने वाला कहे कि बेटे या बेटी को न बताएँ, तो वही धोखा है। ये सारे खेल अकेला रखने पर चलते हैं। एक को बता देने से खेल ख़त्म।
ज़रूरी नंबर
ये नंबर लिखकर फ़ोन के पास रखिए।
ये सरकारी राष्ट्रीय हेल्पलाइन हैं। पहरा इन्हें ऐप के अंदर रखता है ताकि डरे हुए समय में नंबर खोजना न पड़े। बैंकों के वे नंबर हम नहीं देते जिन्हें हम बैंक से पक्का नहीं कर सके — ग़लत नंबर देना वही ठगी बन जाएगी जिससे हम बचा रहे हैं।